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लग जा गले.. Revived

लग जा गले के फिर ये हसीन रात हो ना हो.. शायद फिर इस जनम़ मे, मुलाकात हो ना हो.. ------original by Raja mehandi ali khan-- (हम को मिली हैं आज ये घड़ियाँ नसीब से जी भर के देख लीजिये, हमको करीब से फिर आप के नसीब में, ये बात हो ...