शेर अर्ज़ किया है.....
मैं काफिरों की तरह भटकता हूँ ; हर जगह कितनी बार ये सर पटकता हूँ ; गनीमत ये है की रास्ता हर वक्त सामने होता है , बस इन खयालो की दुनिया में फ़िर एक बार अटकता हूँ ....|| ----------------------------------------------- ऐ इश्क-ऐ-नादान तू कितना खूबसूरत है, हर घडी से जीक्र करता आशिकाना महूरत है; दिन रात हम उन्हीको याद किया करते है, फिर कहाँ वो चाँद और कहाँ मेरे यार की सूरत है..!!!! समंदर है इन आखो मे.. मगर रो नही सकता.. मोहोब्बत से मिली यादो को कभी खो नही सकता.. आज भी तेरी आखो का पाणी मेरे दिल मे ताजा है... उसी दिल के जख्मो को मै आज भी धो नही सकता....-- विक्रम वाडकर कु्छ दर्द बाकी है.. मेरे दिल के किसी कोने मे... याद करे हर आसु.. ये सजा है मेरे रोने मे... --विक्रम वाडकर आपको छीनने की गुस्ताकिया हम बार बार करेंगे.. अपने हाथों से जहर भी देदो... हम हजार बार मरेंगे.... --विक्रम वाडकर .बेवफाई का नाम मत देना इस जुदाई को..हम बेवफा नही... पुरी जिंदगी जी लेंगे तेरी यादो मे... बस कह दो,आप हमसे खफा नही.. --विक्रम वाडकर हम भी वही ...