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Showing posts from July, 2015

नारी

जिसकी पिडा से, तेरा जन्म है.. उसकी सेवा ही, तेरा धर्म है.. अपने भाई का, चाहती हित है.. उसकी रक्षा ही, तेरी प्रित है.. हर एक संकट मे, जो देती साथ है.. दुख की बोलो तब, क्या औकात है.. वही आदी है, व...

तेरी याद

सोच की गहराई मे तन्हाई सी छा गई.. खुश हो रहा था मै.. और याद तेरी आ गई.. लम्हो की बंदिशो मे जिक्र तेरा ही हो रहा.. बिछडने की गुजारीश कि.. और याद तेरी आ गई.. ख्वाबो की अंजुमन मे, तुझे ही पाया ...

शहारा

कळीतुनी पाकुळले दरवळले आज मी.. दवांमध्ये चिंब भिजू दे मला.. मोरपंखी स्पर्शाने मोहरले आज मी... प्रेमातच चिंब राहू दे मला.. दे मला तुझा ओला शहारा.. सागराला मिळावा किनारा.. तुझ्या म...